शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

शंकरपुर ‘सिंगूर’ की राह में…


गंगा बैराज पार सुलगती चिंगारी – ३


प्रवीण शुक्ल
उन्नाव के शंकरपुर, मनभौना और कन्ह्वापुर गाँवों की लगभग ११५२ एकड़ कृषि योग्य भूमि का अधिगृहण विवाद में सुलग रही चिंगारी अब आग का रूप धारण कर रही है ! किसान आंदोलन जोर पकड़ रहा है , हाथों में तिरंगा लेकर विशाल पदयात्रा निकाली जा रही है ! सर पर कफ़न बाँध किसान अपनी जमीन वापस लेने को संकल्पित हो रहे है ! प्रशासनिक चुप्पी से हालात बनने की जगह बिगड सकते है ! महात्मा गांधी की जयंती पर किसानो ने अपने घरों के चूल्हे ना जलाकर सरकार को संभल जाने की चेतावनी दे दी है ! हाई-टेक सिटी परियोजना के लिए नाप जोख करने आने वाले अधिकारियों को खेतों से मार भगाने की अंदरूनी योजना से इस आंदोलन के सिंगूर और भट्टा परसौल जैसे सुलगने की आशंका जोर पकड़ रही है !    इस चिंगारी की आंच को शुरू से और सबसे पहले महसूस कर आपके अपने अखबार न्यूज़ इंडिया ने अपनी टैग लाइन “ सच की थाह – हर सप्ताह “ को सार्थक सिद्ध किया है ! हमारी पहल पर कोने में बसे उपेक्षा के शिकार शंकरपुर की सुध ली जाने लगी है !
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ३० सितम्बर को भारी संख्या में किसान शंकरपुर के रामलीला मैदान पर एकत्र हुए ! जनसभा की गयी जिसमे किसानो ने अपने दर्द व्यक्त किये, सरकारी ज्यादती को अपना नसीब समझ कर चुप बैठे किसान अब इस षड्यंत्र को समझे इसलिए पदयात्रा निकाल कर उनको जागृत करने का अभियान चलाये जाने का निश्चय हुआ ! शंकरपुर से प्रारंभ इस पदयात्रा को हजारो की संख्या में किसानो की भागीदारी ने रैली का स्वरुप दे दिया ! जन जागरण रैली में शामिल किसान हाथो में तिरंगा लेकर और नारेबाजी करते शंकरपुर , मनभौना , कन्ह्वापुर के साथ साथ  आस पास के सन्नी , पिपरी , लख्मीखेडा, मुरलीपुर आदि गाँवों में घूमें  जहाँ अन्य किसान परिवारों  ने जोरदारी से स्वागत कर आने वाले दिनों के संघर्ष के लिए अपने तैयार होने के प्रण को दोहराया ! किसानो ने अपनी जमीन वापस लेने के लिए हर तरह के संघर्ष के लिए तैयार होने की बात कही ! किसान विरोधी नीतियों का अनुपालन करने वाले अधिकारियों का उनके घर में घेराव करने की चेतावनी देते हुए किसान नेताओ ने उनको अभी भी चेत जाने की सलाह दी और प्रदेश सरकार से मामले में फ़ौरन हस्तक्षेप की उम्मीद जताई ! किसान नेताओ ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाते तो ये स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी कथनी और करनी में फर्क है क्युकी किसानो की मांग उनके चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार ही है ! वो तो सिर्फ मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी को उनका चुनावी घोषणा पत्र ही याद दिला रहे है ! छल पूर्वक किसानो को बरगलाकर कपडे से भी सस्ते दाम में जमीन को अधिगृहीत कर लेने वाले अधिकारीयों को दण्डित किया जाए ! अंदर गुपचुप चर्चा में हाई टेक सिटी की नाप जोख के लिए आने वाले अफसरों का घेराव – बंधक जैसी सुगबुगाहट जन्म ले रही है !
फिलहाल बैराज पार के गाँवों में सुलगती चिंगारी आग का रूप लेते दिख रही है , सरकारी हस्तक्षेप का इन्तजार है ! आगे ये देखना है कि सारी गतिविधियों का केन्द्र बना उन्नाव का शंकरपुर गाँव सिंगूर बनेगा या पीपली बन रह जाएगा !



अजय अनमोल – यदि अधिगृहीत भूमि ३१ अक्टूबर तक नहीं लौटाई गयी तो उसी दिन से प्रदेशव्यापी आंदोलन की शुरुवात करेंगे जिसका नाम वादा निभाओ – किसान बचाओ आन्दोलन होगा !


उषा रानी - bl iwjs izdj.k esa “kkfey nks’kh vf/kdkfj;ksa ds f[kykQ l[r dkuwuh dk;Zokgh dj nf.Mr fd;k tk;]bl fdlkuksa dks mudh tehusa rRdky mUgsa okil dh tk;sa vf/kxzg.k vfr vko”;d gS rks ubZ Hkwfe vf/kxzg.k uhfr twu 2011 dks viukrs gq, lektoknh ljdkj vius pqukoh ok;ns (?kks’k.kk i=) ds vuqlkj tehu dk ewY; lfdZy jsV dk N% xquk Hkqxrku djs rHkh Hkwfe vf/kxzg.k gks A



राजेंद्र प्रसाद –  अधिगृहण कर यदि उसपर उसी समय विकास योजना शुरू कर दी जाती तो अब तक इस पूरे क्षेत्र का हुलिया बदल चुका होता , किसानो को रोजगार मिलता . लेकिन न कोई काम हुआ ना मुआवजा ही मिला !


दीपनारायण – हम विकास के विरोधी नहीं है लेकिन किसानो की लाश पर विकास मंजूर नहीं ! जमीन अधिगृहण कर उसका मुआवजा १० साल बाद देना किसानो के  साथ भद्दा मजाक है ! सरकार को तुरंत दखल देना चाहिए !

1 टिप्पणी:

  1. मछली मछली कित्ता पानी
    एड़ी तक …
    मछली मछली कित्ता पानी
    कमर तक …
    मछली मछली …डुबक ……।

    बचपन हो या युवावस्था या फिर ढलती उम्र
    जीवन का पानी कभी एड़ी तक
    कभी कमर तक और कभी डुबक
    सब ख़त्म !
    पर मछली,मछली का खेल,जीवन के रास्ते शाश्वत हैं
    http://www.parikalpnaa.com/2013/12/blog-post_5.html

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